Thursday, August 6, 2026

अलौकिक

ऐतिहासिक: एनएसएफ के विश्व के सबसे बड़े सोलर टेलिस्कोप से सूर्य की अब तक की सबसे शार्प और ऐतिहासिक तस्वीर खींची गई है। जिसमें सूर्य की सतह पर सर्वप्रथम बार साफ भंवर दिख रहे हैं। यह वेदों में वर्णित अर्बन अर्थात चंचल सूर्य की विस्फोटक क्षमता की कतिपय जानकारी देता है। यह तस्वीर अपने आप में एक इतिहास है।चित्र(C): NSF,NSO , प्रस्तुति: #gurudevobservatory

Wednesday, August 5, 2026

आज 5 अगस्त 2026 के सायं काल गुरुदेव वेधशाला से "ऑल्टोकम्युलस क्लाउड" अर्थात "मध्य कपासी मेघ" दिखाई दिए।2 से 7 किलोमीटर की ऊंचाई पर बनने वाले इस बादल से आने वाले समय में वर्षा बंद होने की अथवा नहीं के बराबर बरसात होने की संभावना है।अगर सुबह में यह दिखते तो गोधूली वेला तक तूफान आने की भी संभावना बनी रहती है।देखते हैं माता प्रकृति क्या करती हैं।प्रस्तुति: #gurudevobservatory

आज 5 अगस्त 2026 के सायं काल गुरुदेव वेधशाला से "ऑल्टोकम्युलस क्लाउड" अर्थात "मध्य कपासी मेघ" दिखाई दिए।2 से 7 किलोमीटर की ऊंचाई पर बनने वाले इस बादल से आने वाले समय में वर्षा बंद होने की अथवा नहीं के बराबर बरसात होने की संभावना है।अगर सुबह में यह दिखते तो गोधूली वेला तक तूफान आने की भी संभावना बनी रहती है।देखते हैं माता प्रकृति क्या करती हैं।
प्रस्तुति: #gurudevobservatory

Tuesday, August 4, 2026

https://sandesh.com/explainer/news/india/ahmedabad/sandesh-digital-explainer-12-august-2026-total-solar-eclipse-perseid-meteor-shower-facts-rumors

https://sandesh.com/explainer/news/india/ahmedabad/sandesh-digital-explainer-12-august-2026-total-solar-eclipse-perseid-meteor-shower-facts-rumors

Monday, August 3, 2026

दिखेगा और नहीं भी दिखेगा

दिखेगा और नहीं भी दिखेगा: आगामी 12 अगस्त 2026 की रात्रि खगोलीय घटनाओं के लिए अत्यंत अद्भुत है। (१) उस दिन अमावस्या होगी, (२) उस दिन खग्रास सूर्य ग्रहण होगा जो भारत से नहीं दिखाई देगा,(३) उस दिन की रात्रि में ययाति की उल्का वर्षा होगी जो भारत से दिखेगी,(४)उसी दिन पूर्व में सूर्योदय से पहले 6 ग्रह एक साथ दिखाई देंगे।जिसमें से केवल दो मंगल और शनि ही खुली आंखों से दिखाई देंगे। मतलब कुछ दिखेगा और कुछ नहीं दिखेगा। मगर 12 तारीख होगी अद्भुत।तो उसे जो देख सकते हैं उसे देखें और कुदरत को थैंक्स कहना ना भूले। चित्र (C) और प्रस्तुति: #gurudevobservatory

Wednesday, July 29, 2026

श्री गुरु पूर्णिमा

आज 29 जुलाई 2026, आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा, श्री गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर श्री गायत्री मंदिर , कारेलीबाग पर प्रातः गायत्री यज्ञ एवं गोधूली वेला में दिव्य दीप यज्ञ, गुरु पूजन,आरती एवं युग साहित्य विक्रय मंगलमय वातावरण में संपन्न हुआ।
प्रस्तुति: #gurudevobservatory

Tuesday, July 28, 2026

कैसे जाना?

ऋषियों ने कैसे जाना होगा? वेदों में दो या अधिक तारों के समूह को नक्षत्र के नाम से जाना जाता है। नक्षत्र अर्थात जिसका क्षरण नहीं होता वह। अब तक विज्ञान मानता था कि हीरनी अर्थात मृगशीर्ष नक्षत्र में पाए जाने वाला "आर्द्रा" केवल एक तारा है। हमसे 640 प्रकाश वर्ष दूर,सूर्य से 4,000 गुना बड़ा और 19 गुना बजनी यह लाल महादैत्य तारा अकेला नहीं है मगर उसका साथीदार भी है। जिसे "आर्द्रा बी" करके संबोधित किया जाएगा।ऋषियों ने आर्द्रा को हमेशा नक्षत्र कहा है । वेद काल में बिना टेलीस्कोप, बिना कोई खगोल यंत्रों की मदद से उन्होंने ने यह कैसे जाना होगा कि आर्द्रा एक तारा नहीं मगर नक्षत्र है,एक से ज्यादा तारक है? आज भी अगर हम अपनी अंतर्दृष्टि को जागृत कर लेते हैं तो हम भी ब्रह्मांड के महा ज्ञान को, ब्रह्म ज्ञान को पा सकते हैं। काश ईश्वर हम पर ऐसी दृष्टि डालें। चित्र क्रेडिट: (C) ESO
प्रस्तुति: #gurudevobservatory