विश्व विख्यात वैज्ञानिक आइंस्टीन कहां है की "प्रकृति को ज्यादा से ज्यादा समझिए, तो आप हर वस्तु समझ पाएंगे, हर समस्या का समाधान मिलेगा"।पर दुर्भाग्य से हम वेदों की संतान, प्रकृति पूजक ऋषियों की संतान, प्रकृति माता को ही प्रताड़ित करते चले जा रहे हैं और यही कारण है कि हम अशांत से और अशांत होते चले जा रहे हैं।दुखी से और दुखी होते चले जा रहे हैं।क्या आपको नहीं लगता माता प्रकृति की ओर वापिस चलना चाहिए? सत्य बोलना।
VAYAM RASTRE JAGRUYAM PUROHITA
I FOLLOW YUGRISHI PT.SHRI RAM SHARAMA ACHARAYAJI.ACCORDING TO HIM WE ARE JAGAD GURU,WE HAVE TO STRENTHEN OUR COUNTRY,OUR PLANET AS A REAL MASTER "PUROHIT" . RIDVEDA SAID THIS AS "VAYAM RASTRE JAGRUYAM PUROHITA" MEANS WE ARE THE PERSON WHO HAVE COURAGE TO DEVELOP OUR GLOBE.
Monday, August 31, 2026
वेद विज्ञान
वेद और विज्ञान: विज्ञान में स्पेस और टाइम से बने "स्पेस फैब्रिक" का वर्णन आता है,जो पूरे ब्रह्मांड में फैलता चला जा रहा है,और सभी पदार्थ उसी में चल रहे हैं। जिसका वर्णन थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी में भी आता है। वेदों में इसे स्पष्ट रूप से अनादि काल पूर्व कहा गया था। उसमें अनंत आसमान में ताना-बाना के रूप में इस स्पेस फैब्रिक का, स्पेस टाइम का स्पष्ट वर्णन किया गया है। कभी समय मिलते वेद अवश्य पढ़े। चित्र:(C): ESA, प्रस्तुति: #gurudevobservatory
Sunday, August 30, 2026
यह आप क्या कहते हो?
यह क्या कह रहे हो आप? हम बचपन से पढ़ते आए हैं कि सौरमंडल के सभी ग्रह सूर्य के आसपास घूमते हैं।मगर यह पूर्णतया सत्य नहीं है। वास्तव में 40% टाइम में ही सूर्य के आसपास वे घूमते हैं ।और 60% टाइम पर सूर्य और बाकी के ग्रह एक केंद्रक के आसपास घूमते है, जिसे अंग्रेजी में "बेरीसेंटर"कहा जाता है। यह केंद्रक वर्तमान में सूर्य से बाहर है, मगर जनवरी-फरवरी२०२७ में, सभी ग्रहों के सूर्य के एक दूसरे से ऑपोजिट डायरेक्शन में आने से गुरु ग्रह के खिंचाव और बाकी के ग्रहों के खिंचाव के चलते यह केंद्रक वापस सूर्य में चला जाएगा और हम फिर से कुछ समय के लिए सूर्य के आसपास घूमने शुरू कर देंगे है। ना आश्चर्य !!!!!! मगर यही सत्य है।
Thursday, August 27, 2026
Tuesday, August 25, 2026
चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण: खग्रास की खंडग्रास? आगामी२८/८/२०२६, श्रावणी पूर्णिमा, रक्षाबंधन पर्व पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा। 96% तक चंद्रमा ढक जाएगा। यानी खग्रास के नजदीक होगा। और खग्रास जैसा ही ताम्रवर्णी चंद्र दिखेगा। मगर होगा खंडग्रास।कैसी आश्चर्य की बात है!!!!कुल 339 मिनट चलने वाले इस चंद्र ग्रहण को अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका से देखा जाएगा। भारत में सुबह 7:00 बजे से लेकर के दोपहर 12:30 बजे तक यह चंद्र ग्रहण रहेगा। अर्थात दिन होगा चंद्र दिखेगा ही नहीं तो चंद्र ग्रहण भी दिखेगा नहीं। एसेंडिंग नोड अर्थात राहु बिंदु पर होने वाला,138वीं सारोस साइकिल का यह चंद्र ग्रहण अपने आप में अनूठा होगा, क्योंकि ताम्रवर्णी चंद्र दिखेगा मगर खग्रास नहीं होगा। चित्र(C) Larry Koehn और Fred Espenak ,
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