Thursday, February 26, 2026

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वर्तमान में अगर बादल ना हो तो श्रेष्ठ तारों को देखा जा सकता है। क्योंकि मिल्की वे के पथ से हम गुजर रहे हैं।आज फाल्गुन शुक्ल दशमी, २६/२/२६ को गुरुदेव वेधशाला से मृगशीर्ष नक्षत्र, बाणरज, आर्द्रा, व्याध, ब्रह्महृदय, मृगशीर्ष निहारिका आदि नक्षत्र दिखे गए। साथ में गुरु और चंद्रमा की केवल 7 डिग्री की अद्भूति युति देखी गई जो कल 27 को और भी नजदीक होगी। इन सबको देखिए और माता प्रकृति का आभार मानना ना भूले।प्रस्तुति: #gurudevobservatory https://www.gurudevobservatory.co.in/

वर्तमान में अगर बादल ना हो तो श्रेष्ठ तारों को देखा जा सकता है। क्योंकि मिल्की वे के पथ से हम गुजर रहे हैं।आज फाल्गुन शुक्ल दशमी, २६/२/२६ को गुरुदेव वेधशाला से मृगशीर्ष नक्षत्र, बाणरज, आर्द्रा, व्याध, ब्रह्महृदय, मृगशीर्ष निहारिका आदि नक्षत्र दिखे गए। साथ में गुरु और चंद्रमा की केवल 7 डिग्री की अद्भूति युति देखी गई जो कल 27 को और भी नजदीक होगी। इन सबको देखिए और माता प्रकृति का आभार मानना ना भूले।
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Sunday, February 22, 2026

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चार वर्ष बाद

4 वर्ष बाद सर्वप्रथम: 2022 के बाद आज 22 फरवरी 2026 को, अर्थात 4 वर्ष बाद, सबसे पहला दिन ऐसा आया जिसमें सूर्य पर एक भी कलंक नहीं है। यानी कि आज "स्पॉटलेस डे" है । इसका मतलब यह नहीं की सोलर मिनिमम आ गया, अभी उसको 1 साल बाकी है ।मगर अब सूर्य के ऊपर इस प्रकार की हलचल होना प्रारंभ होगी और सूर्य पर सूर्य कलंक कम होते हुए जाएंगे। यह आने वाले समय की झलक है।इसी को वेदों में क्रांतदर्शी सूर्य कहा गया है। चित्र(C):NASA,SOHO,ESA
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Friday, February 20, 2026

मनोहारी

गत 17 फरवरी 2026 को माघ/फाल्गुन कृष्ण अमावस्या के दिन, दक्षिण गोलार्ध में अत्यंत मनोहारी कंकणाकृति सूर्य ग्रहण हुआ था।इसे ज्यादातर पेंग्विंस नाम के पंछियों ने देखा था मगर विज्ञान भी इसमें पीछे नहीं था। ESA के प्रोबा 2 उपग्रह ने उसको आसमान से देखा और उसको सदा के लिए चित्रांकित कर दिया। सूर्य के आसपास जो अग्नि का चक्र दिख रहा है उसे ही कंगनाकृति अथवा रिंग ऑफ फायर कहते हैं। जब चंद्रमा पृथ्वी से अधिक नजदीक होता है तब इस प्रकार का कभी कभार दिखाई देने वाला ग्रहण दिखाई देता है।उसे देखें और विज्ञान एवं माता प्रकृति को थैंक्स कहना ना भूले।
 चित्र (C): ESA, प्रस्तुति: #gurudevobservatory https://www.gurudevobservatory.co.in/