Tuesday, July 28, 2026

कैसे जाना?

ऋषियों ने कैसे जाना होगा? वेदों में दो या अधिक तारों के समूह को नक्षत्र के नाम से जाना जाता है। नक्षत्र अर्थात जिसका क्षरण नहीं होता वह। अब तक विज्ञान मानता था कि हीरनी अर्थात मृगशीर्ष नक्षत्र में पाए जाने वाला "आर्द्रा" केवल एक तारा है। हमसे 640 प्रकाश वर्ष दूर,सूर्य से 4,000 गुना बड़ा और 19 गुना बजनी यह लाल महादैत्य तारा अकेला नहीं है मगर उसका साथीदार भी है। जिसे "आर्द्रा बी" करके संबोधित किया जाएगा।ऋषियों ने आर्द्रा को हमेशा नक्षत्र कहा है । वेद काल में बिना टेलीस्कोप, बिना कोई खगोल यंत्रों की मदद से उन्होंने ने यह कैसे जाना होगा कि आर्द्रा एक तारा नहीं मगर नक्षत्र है,एक से ज्यादा तारक है? आज भी अगर हम अपनी अंतर्दृष्टि को जागृत कर लेते हैं तो हम भी ब्रह्मांड के महा ज्ञान को, ब्रह्म ज्ञान को पा सकते हैं। काश ईश्वर हम पर ऐसी दृष्टि डालें। चित्र क्रेडिट: (C) ESO
प्रस्तुति: #gurudevobservatory

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