सूर्य के पीछे चले जा रहे सूर्य कलंक में से आज तड़के सौर ज्वाला निकली, जो अद्भुत थी। इसी को वेदों में सूर्य का "अर्वन" अर्थात चंचल स्वरूप कहा गया है। और यह सूर्य की चंचलता ही सूर्य में प्राण होने के निशानी है।जिसे वेदों में सूर्य का "प्रचेता" स्वरूप कहा गया है और वही अर्वाचीन विज्ञान भी कहता है।(C)चित्र: GOES,NASA
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