विश्व विख्यात वैज्ञानिक आइंस्टीन कहां है की "प्रकृति को ज्यादा से ज्यादा समझिए, तो आप हर वस्तु समझ पाएंगे, हर समस्या का समाधान मिलेगा"।पर दुर्भाग्य से हम वेदों की संतान, प्रकृति पूजक ऋषियों की संतान, प्रकृति माता को ही प्रताड़ित करते चले जा रहे हैं और यही कारण है कि हम अशांत से और अशांत होते चले जा रहे हैं।दुखी से और दुखी होते चले जा रहे हैं।क्या आपको नहीं लगता माता प्रकृति की ओर वापिस चलना चाहिए? सत्य बोलना।
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