Friday, July 5, 2019

A degree of concern : गर्मी की बढोत्तरी है खतरे की घंटी :विश्वभर में मानवसर्जित क्लाइमेट चेंज से बढ़ रही गर्मी खतरनाक होने जा रही है। हमको लगता है की एक 1-2 डिग्री से क्या ? पर पुरे विश्व में कोई भी भौतिकी के नियमो का उल्लघन नहीं कर सकता अन्यथा फल भुगतना पड़ता है यथा डिग्री बढ़ने से पानी बाष्प में बदल जाता है। अर्थात नियमो का पालन अनिवार्य है। बढ़ती गर्मी से बाढ़ ,सूखा ,चक्रवात ,घनघोर बरसात ,ऑक्सीजन लेवल में बदलाव,कृषि -जिव सृस्टि -जल चक्र -वृष्टि चक्र और मानवीय सभ्यता पर बढ़ेगा खतरे का प्रभाव। हिटवेव -कोल्ड वेव जैसे एक्सट्रीम वेधर इवेंट्स बढ़ेंगे। जैव विविधता और इको सिस्टम -अन्न उत्पादन -समुद्र पर कुठाराघात होगा। समुद्री जीवन ,वनसृस्टि ,पेयजल ,बरसात ,आर्थिक संतुलन,मानवीय सभ्यता पर सीधा असर होगा। क्या अब भी हम नहीं संभलेंगे ? करे या मरे। अभी या कभी नहीं। कुछ करे माता वसुंधरा -प्रकृति-अपने बच्चो के लिए! समय निकल जाने पर इस्वर को ऊपर जाकर क्या कहेंगे ? न्यूनतम इस मॉनसून में वृक्षारोपण ,जल सरंक्षण तो करे ! कुछ तो करे मित्रो ! Credit : NASA  दिव्यदर्शन पुरोहित http://www.gurudevobservatory.co.in/







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