वेद भगवान कहते हैं कि परम ब्रह्म से उत्पन्न ब्रह्मांड उसकी चारों ओर प्रदक्षिणा करता है,और स्वस्तिक इसी ब्रह्मण के कारण उत्पन्न स्वरूप है। विज्ञान को अब तक इसका कोई प्रमाण नहीं मिला था। मगर वर्तमान में हवाई यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों ने सूर्य,पृथ्वी, सौरमंडल और आकाशगंगा की तरह ही, परंतु अत्यंत धीमी गति से ब्रह्मांड गोल-गोल घूम रहा है ऐसे प्रमाण प्राप्त किए है। उनके मुताबिक करीब 500 अरब वर्ष में एक प्रदक्षिणा ब्रह्मांड पूरी करता है। ऋषियों ने यह सत्य कैसे जाना होगा? चित्र(C)NASA,
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